डायनासोर का अंत कैसे हुआ? धरती पर आया था महाविनाश

डायनासोर का अंत कैसे

 हुआ? धरती पर आया था

 महाविनाश

डायनासोर का अंत कैसे  हुआ? धरती पर आया था  महाविनाश

एक समय ऐसा था जब हमारी धरती पर सिर्फ डायनासोर का राज हुआ करता था। जंगलों से लेकर समुद्र तक हर जगह इन्हीं विशाल जीवों का कब्जा था। कुछ डायनासोर बेहद शांत स्वभाव के थे, जबकि कुछ इतने खतरनाक थे कि उनके सामने कोई भी जीव टिक नहीं सकता था। करीब 14 करोड़ सालों तक इन विशालकाय जीवों ने धरती पर शासन किया। लेकिन फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि दुनिया से इनका नामो-निशान मिट गया?

आज भी यह सवाल लोगों को हैरान करता है कि आखिर डायनासोर का अंत कैसे हुआ। वैज्ञानिकों की रिसर्च के अनुसार इसके पीछे एक भयानक अंतरिक्षीय घटना जिम्मेदार थी।


जब मौत अंतरिक्ष से धरती की ओर बढ़ रही थी

करीब 6 करोड़ 50 लाख साल पहले धरती पर सब कुछ सामान्य था। जंगल हरे-भरे थे, समुद्र शांत था और डायनासोर अपने जीवन में व्यस्त थे। लेकिन उसी समय अंतरिक्ष में एक विशाल एस्टेरॉइड तेजी से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा था।

वैज्ञानिकों के मुताबिक यह एस्टेरॉइड मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच मौजूद क्षुद्रग्रह बेल्ट से निकला था। किसी बड़ी टक्कर के बाद इसकी दिशा बदल गई और यह सीधा पृथ्वी की तरफ आने लगा। इसकी रफ्तार लगभग 70,000 किलोमीटर प्रति घंटा थी।


धरती से टकराते ही मच गया महाविनाश

जैसे ही यह विशाल एस्टेरॉइड पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल हुआ, घर्षण की वजह से यह आग के बड़े गोले में बदल गया। इसकी चमक इतनी तेज थी कि कई जीव इसे देखकर ही अंधे हो गए।

कुछ ही मिनटों बाद यह एस्टेरॉइड मेक्सिको की खाड़ी के पास जाकर टकराया। टक्कर इतनी भयानक थी कि लाखों परमाणु बमों जितनी ऊर्जा पैदा हुई। धरती कांप उठी और वहां लगभग 180 किलोमीटर चौड़ा विशाल गड्ढा बन गया।

इस टक्कर के बाद:

  • पूरी धरती पर भूकंप आने लगे
  • समुद्र में विशाल सुनामी उठी
  • ज्वालामुखी फटने लगे
  • आसमान धूल और धुएं से भर गया

कई महीनों तक नहीं दिखा सूरज

विस्फोट के बाद लाखों टन धूल और पत्थर आसमान में फैल गए। धीरे-धीरे पूरी पृथ्वी अंधेरे में डूब गई। सूरज की रोशनी धरती तक पहुंचना लगभग बंद हो गई।

जब सूरज की रोशनी नहीं पहुंची तो पेड़-पौधे सूखने लगे। जंगल जलकर खत्म हो गए और खाने की कमी शुरू हो गई। बड़े-बड़े डायनासोर, जिन्हें हर दिन बहुत ज्यादा भोजन चाहिए होता था, भूख और गर्मी की वजह से मरने लगे।

वैज्ञानिक मानते हैं कि इस घटना में धरती की लगभग 75% प्रजातियां खत्म हो गई थीं।


आखिर छोटे जीव ही क्यों बच पाए?

इस महाविनाश के बाद केवल वही जीव बच पाए जो आकार में छोटे थे और कम भोजन में जीवित रह सकते थे। छोटे स्तनधारी जीव जमीन के नीचे छिपकर बच गए। धीरे-धीरे इन्हीं जीवों से आगे चलकर नई प्रजातियां विकसित हुईं, जिनमें इंसान भी शामिल हैं।

यानी अगर डायनासोर खत्म नहीं होते, तो शायद आज इंसानों का अस्तित्व भी नहीं होता।


क्या सच में सिर्फ एस्टेरॉइड ही वजह था?

कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि डायनासोर के अंत के पीछे सिर्फ एस्टेरॉइड नहीं बल्कि ज्वालामुखी विस्फोट और जलवायु परिवर्तन भी जिम्मेदार थे। हालांकि सबसे ज्यादा स्वीकार की जाने वाली थ्योरी वही है जिसमें विशाल एस्टेरॉइड की टक्कर को मुख्य कारण माना गया है।


निष्कर्ष

डायनासोर का अंत धरती के इतिहास की सबसे बड़ी विनाशकारी घटनाओं में से एक था। एक पल में पूरी दुनिया बदल गई और करोड़ों साल तक राज करने वाले जीव हमेशा के लिए खत्म हो गए। लेकिन इसी विनाश ने धरती पर नए जीवन की शुरुआत भी की।

सोचिए, अगर वह एस्टेरॉइड पृथ्वी से टकराया ही नहीं होता, तो आज हमारी दुनिया कैसी होती?


No comments

Powered by Blogger.